दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू होने से नई ऊंचाइयां छू रही है हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मिल्कफेड रोजाना किसानों से खरीद रहा औसतन 2.32 लाख लीटर गाय का दूध

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (कुल्लू ) 7 सितंबर। हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूरदर्शी सोच अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि गांव, किसान, महिलाएं और ग्रामीण युवा प्रदेश की आर्थिक प्रगति के केंद्र में हों। इसी नीति के अंतर्गत, दूध उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया गया है, जो हिमाचल के इतिहास में एक उल्लेखनीय और क्रांतिकारी कदम है। दूध उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, प्राकृतिक खेती और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं।

प्रतिदिन 38,400 किसानों से दूध की खरीद

प्रदेश सरकार ने देश में पहली बार दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ 38,400 किसानों से प्रतिदिन औसतन 2.25 लाख लीटर गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान प्रसंघ के द्वारा औसतन 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन दूध की खरीद की गई। इसी प्रकार 1,482 भैंस पालकों से प्रतिदिन 7,800 लीटर दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। एक नई पहल के अंतर्गत ऊना जिला में पायलट आधार पर बकरी पालकों से 70 रुपये प्रति लीटर की दर से बकरी का दूध खरीदा जा रहा है। इसी प्रकार प्रसंघ द्वारा किसानों से प्रतिदिन कुल मिलाकर 2.32 लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है।

परिवहन सब्सिडी में इज़ाफा

दुग्ध समितियों को प्रोत्साहन देने के लिए परिवहन सब्सिडी को 1.50 रुपये से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर किया है। दो किलोमीटर से अधिक दूरी तक दूध खरीद केन्द्र तक स्वयं दूध ले जाने वाले पशुपालकों और समितियों को 2 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है। हिमाचल सरकार ने दूध उत्पादकों की सुविधा के लिए बल्क मिल्क कूलर स्थापित करने का निर्णय भी लिया है। इस निर्णय से दूध की गुणवत्ता व इसका समुचित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा किसानों को कमीशन भी प्रदान की जाएगी।

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