एक्सपोजर विजिट से आधुनिक तकनीकों, उद्योग और वैश्विक कार्य संस्कृति की मिली व्यावहारिक समझ: राजेश धर्माणी

कजाकिस्तान में हिमाचल के आईटीआई प्रशिक्षुओं को उद्योग, इंजीनियरिंग, वैश्विक शिक्षा एवं नवाचार का मिला व्यावहारिक अनुभव

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (बिलासपुर )16 जुलाई। तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) से चयनित 30 प्रशिक्षुओं ने बीते दो दिनों के दौरान आधुनिक उद्योगों, इंजीनियरिंग प्रणालियों, वैश्विक शिक्षा तथा नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी कर रहे हैं। उनके साथ तकनीकी शिक्षा निदेशक रोहित राठौर भी मौजूद हैं।

14 जुलाई को प्रतिनिधिमंडल ने समाल वाटर बॉटलिंग प्लांट का भ्रमण किया, जहां प्रशिक्षुओं ने जल शुद्धिकरण, स्वचालित बोतल निर्माण, भराई, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण तथा खाद्य सुरक्षा मानकों की आधुनिक प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इसके पश्चात दल ने राखात चॉकलेट फैक्ट्री का भ्रमण किया, जहां चॉकलेट निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता प्रबंधन तथा बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की कार्यप्रणाली को निकट से समझा। प्रशिक्षुओं ने ग्रीन मार्केट का भ्रमण कर स्थानीय कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य पदार्थों तथा बाजार प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन किया, जिससे उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं उद्यमिता के विभिन्न आयामों की जानकारी मिली। इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने एसेंटाई नदी क्षेत्र का भ्रमण किया, जहां प्रशिक्षुओं ने शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन तथा सार्वजनिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित रखरखाव का अवलोकन किया।
15 जुलाई को कार्यक्रम की शुरुआत हॉलिडे इन, अल्माटी में आयोजित एक तकनीकी सत्र से हुई, जिसमें होटल के सर्विस इंजीनियर ने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय होटल की जल आपूर्ति एवं शुद्धिकरण प्रणाली, केंद्रीय हीटिंग व्यवस्था, प्लंबिंग नेटवर्क, एचवीएसी ऊर्जा प्रबंधन तथा मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं प्लंबिंग (एमईपी) सेवाओं के समन्वित संचालन की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षुओं ने जाना कि आधुनिक होटल उद्योग में इंजीनियरिंग सेवाएं किस प्रकार उत्कृष्ट अतिथि सेवाओं का आधार बनती हैं।
इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने शिम्बुलाक माउंटेन रिजॉर्ट एवं केबल कार का भ्रमण किया। यहां ऑपरेशन मैनेजर ने केबल कार प्रणाली के संचालन, नियंत्रण प्रणाली, सुरक्षा मानकों, नियमित निरीक्षण, रखरखाव, आपदा प्रबंधन तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षुओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक यांत्रिक, विद्युत एवं स्वचालन आधारित तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को निकट से समझा। दोपहर बाद हॉलिडे इन, अल्माटी में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के साथ शैक्षणिक संवाद आयोजित किया गया।

पहला व्याख्यान क्रॉस-कल्चरल कम्युनिकेशन इन मैनेजमेंट विषय पर हायर स्कूल ऑफ मीडिया एंड इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन, तुरान यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. आइतोल्किन अशिमोवा ने दिया। उन्होंने वैश्विक कार्यस्थलों में प्रभावी संवाद, सांस्कृतिक विविधता, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क तथा व्यावसायिक नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला।

दूसरा व्याख्यान पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, गवर्नेंस एंड इंटरनेशनलाइजेशन ऑफ हायर एजुकेशन इन सेंट्रल एशिया विषय पर प्रो. अलीशेर कादिरोव ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कजाकिस्तान की उच्च शिक्षा प्रणाली में हुए सुधारों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा विदेशी विश्वविद्यालयों को कजाकिस्तान में अपने परिसर स्थापित करने के लिए प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन प्रयासों से कजाकिस्तान मध्य एशिया में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

तीसरा व्याख्यान बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च, इनोवेशन एंड डॉक्टोरल स्टडीज इन कजाकिस्तान विषय पर अल्माटी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी की प्रो. सदिकोवा नरगिजा अलालदीनकिजी ने दिया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के साथ-साथ स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, इंडस्ट्री 4.0, ग्रीन केमिस्ट्री, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में कजाकिस्तान की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी साझा की।

इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के आईटीआई प्रशिक्षुओं को वैश्विक औद्योगिक प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान एवं नवाचार तथा अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति से परिचित कराना है, ताकि वे अपने तकनीकी कौशल को और अधिक सुदृढ़ बनाकर भविष्य में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन भ्रमण युवाओं में नवाचार, गुणवत्ता, अनुशासन, आत्मविश्वास तथा वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस भ्रमण से प्राप्त अनुभव प्रशिक्षुओं को भविष्य में बेहतर तकनीशियन, कुशल कार्यबल एवं सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करेंगे तथा हिमाचल प्रदेश के कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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