बी–1 परीक्षा की खामियों ने खोली व्यवस्था परिवर्तन की पोल, बिना इंतजाम क्यों करवाई परीक्षा : जयराम ठाकुर

जब 4000 लोगों की परीक्षा का आयोजन ढंग से नहीं हो रहा है तो बड़ी परीक्षाएं कैसे होंगी?

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (मंडी ) 26 अक्तूबर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी से जारी बयान में कहा है कि हिमाचल पुलिस के विभागीय प्रोन्नति परीक्षा (बी–1) में सरकार की व्यवस्था ही बैठ गई। सरकार एक तरफ लोगों को नौकरी न देने के हजार तरीके खोज रही है तो दूसरी तरफ डिपार्टमेंटल प्रमोशन एग्जाम में भी लापरवाही बरत रही है। बिना किसी इंतजाम के इतनी बड़ी परीक्षा का आयोजन सरकार की मंशा और तैयारियों पर सवाल उठा रहा है। लोग 6 घंटे तक बैठे रहे लेकिन व्यवस्थापकों द्वारा तकनीकी खामी दूर नहीं की जा सकी। किसी जगह पर लोगों के जवाब सबमिट नहीं हो रहे थे तो कहीं पर प्रश्नों के उत्तरों में ही गलत विकल्प आ रहे थे। कहीं पर मेन सर्वर से परीक्षा केंद्र लिंक नहीं हो पाए तो कहीं पर एक ही साथ शुरू हुई परीक्षा में प्रश्नों की संख्या में, तो कहीं पर परीक्षा के समयावधि में भारी अंतर देखने को मिल रहा था। पहली पारी में परीक्षा देने आए लोगों को दूसरी पारी में भी परीक्षा देने के लिए बैठाया गया। पूरी परीक्षा में ही उहापोह और अराजकता की स्थिति बनी रही। जब यह बात पूरी तरीके से बाहर आ गई और परीक्षार्थियों द्वारा भारी पैमाने पर विरोध हुआ तो आनन-फानन में प्रशासन द्वारा यह परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। यह सरकार की नाकामी और खराब प्रबंधन का एक जीता जागता उदाहरण है। बिना ट्रायल रन किए ही परीक्षा का आयोजन करवाया गया या फिर विभिन्न मानकों की अनदेखी की गई। यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकार द्वारा आयोजित की गई परीक्षा पर प्रश्न चिन्ह उठ रहा हो।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की नाकामी की वजह से ही 4000 से ज्यादा लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बहुत सारे छोटे बच्चे भी जो अपने मां के साथ मजबूरन आए थे उन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ा। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था बैठाने वाली सरकार यदि 4 हजार लोगों के डिपार्मेंटल प्रमोशन एक्जाम नहीं करवा सकती है तो 1 लाख सरकारी नौकरियों का वादा कैसे पूरा करेगी? यह सरकार कैसे बड़े पैमाने पर भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करवाएगी? कैसे प्रदेश के युवाओं को रोजगार देगी? राजनीतिक विद्वेष और युवाओं को रोजगार से वंचित रखने के लिए ही इस प्रकार से कर्मचारी चयन आयोग को पूरी तरीके से भंग कर दिया था। एक लाख सरकारी नौकरियों की गारंटी देकर हिमाचल में जनादेश चुराने वाली कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री यह जानते हैं जब प्रतियोगी परीक्षाएं करवाने वाली संस्थाएं ही नहीं रहेगी तो लोगों को रोजगार भी नहीं देना पड़ेगा। सरकार की कार्यप्रणाली से यह साफ है कि इस सरकार का इरादा प्रदेश के लोगों से उनकी नौकरियां उनका प्रमोशन छीनना है देना नहीं।

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