कांगड़ा के सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम में आयोजित अमृत महोत्सव में हुए शामिल
चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की आध्यात्मिक एवं सामाजिक यात्रा को बताया प्रेरणादायी
भारत की सनातन ज्ञान परम्परा का विश्व के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान: राज्यपाल
डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (कांगड़ा )20 सितंबर। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शनिवार सायं सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम, संदीपनी हिमालय में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के प्रेरणादायी जीवन एवं योगदान को समर्पित था।
इस अवसर पर, चिन्मय मिशन के 75 वर्षों की यात्रा, आध्यात्मिक गतिविधियों और समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को भी स्मरण किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि चिन्मय मिशन ने भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्वामी चिन्मयानंद जी के विचारों ने देश-विदेश में लोगों को भारतीय दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन से जोड़ने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, सेवा, साधना और मानव कल्याण की समृद्ध परंपरा रही है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की महान ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सेवा-संस्कृति का भाव हमारी पहचान है। हमारी संस्कृति ने सदैव पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश दिया है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना भारत की इसी महान परंपरा को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने और कर्तव्य का बोध कराने वाली महान प्रेरणा है।
हमारी संस्कृति में ज्ञान, भक्ति और सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। राज्यपाल ने कहा, “ज्ञान हमें सत्य का बोध कराता है, भक्ति हमारे भीतर श्रद्धा और विनम्रता का भाव पैदा करती है तथा सेवा हमें “मैं” से “हम” की ओर ले जाती है। यही सोच समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने की शक्ति प्रदान करती है।”
उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन किए हैं। ऐसे समय में हमें आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को भी बनाए रखना होगा। विकास तभी सार्थक है, जब उसके केंद्र में मानवता और समाज का कल्याण हो। उन्होंने कहा कि भारत ने सदैव पूरे विश्व के कल्याण की कामना की है। हमारी सनातन चेतना का मूल भाव ही “सर्वे भवन्तु सुखिनः” है। हमें इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए विश्व कल्याण के लिए कार्य करना होगा।
श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी देश की सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं में संस्कार, राष्ट्रभक्ति, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी महान संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हुए उन्हें आधुनिक ज्ञान एवं तकनीक के साथ आगे बढ़ने के अवसर देने होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन चेतना, ज्ञान परंपरा और सेवा भावना को आगे बढ़ाकर हम न केवल अपने राष्ट्र को समृद्ध कर सकते हैं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का संदेश भी पढ़ा गया।
स्वामी मित्रानंद ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के प्रेरणादायी जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वरिष्ठ आचार्य परमशेखर स्वामी माधवानंद, स्वामी अनुकूलानंद , पद्मश्री क्षमा मैत्रेय, ट्रस्टी डाक्टर राजन गुप्ता, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित चिन्मय मिशन से जुड़े पदाधिकारी, साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


