उच्चतर शिक्षा में सुधार पर मंथन
डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (कुल्लू )20 सितंबर ।उच्चतर शिक्षा में सुधार विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह की अध्यक्षता सचिव शिक्षा राकेश कंवर ने की।
उन्होंने उच्चतर शिक्षा विभाग को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच संस्थानों को एक-दूसरे की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में महाविद्यालयों द्वारा किए गए विभिन्न नवाचारों एवं उपलब्धियों पर बेहद प्रभावी प्रस्तुतियां दी गईं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों द्वारा किए जा रहे नवाचारों एवं सफल पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए आपसी अनुभव साझा करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा अपने संस्थानों में किए जा रहे नवाचारों, उपलब्धियों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर प्रभावी प्रस्तुतियां दी गईं। उन्होंने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक मुक्त परिसर, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास की दिशा में महाविद्यालयों द्वारा किए जा रहे प्रयास अनुकरणीय हैं। उन्होंने महाविद्यालयों में हरित ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग की दिशा में भी प्रयास करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नवाचार, संसाधनों का बेहतर उपयोग, तकनीक का समावेश तथा विद्यार्थियों को समाज और समुदाय से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
सचिव शिक्षा ने कहा कि महाविद्यालयों और विद्यालयों के बीच उपलब्ध संसाधनों की साझेदारी एवं सहयोग की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इन संसाधनों का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में खेल एवं शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। इस प्रकार की व्यवस्था से संस्थानों को अपनी कार्यप्रणाली का स्व-मूल्यांकन करने तथा सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने प्राध्यापकों से तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने तथा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों एवं विषय-विशेषज्ञों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ अध्यापकों को भी विषय की नवीनतम जानकारी एवं विशेषज्ञता से लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने मुख्य विषय के साथ-साथ अन्य संकायों और विशेष रूप से विज्ञान के अध्ययन के लिए भी प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
राकेश कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच तथा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रदेश में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी शैक्षणिक एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर नई व्यवस्थाओं, तकनीकों, संस्थानों और कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। सम्मेलन में प्राचार्यों द्वारा महाविद्यालयों के अध्यापकों को भी एक्सपोजर विजिट का अवसर प्रदान करने के सुझाव का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए भी ऐसे अवसर उपयोगी सिद्ध होंगे। इससे उनके ज्ञान एवं अनुभव का विस्तार होगा तथा वे इन अनुभवों को विद्यार्थियों तक पहुंचा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि ड्रग्स का दुरुपयोग आज समाज और विशेषकर युवाओं के समक्ष बड़ी चुनौती है। उन्होंने महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने, उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने तथा स्वस्थ एवं जिम्मेदार जीवनशैली के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
उन्होंने महाविद्यालयों द्वारा शुरू की गई नवाचारपूर्ण पहलों को केवल संस्थान स्तर तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने तथा आवश्यकतानुसार आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न पहलों की प्रगति, उपलब्धियों और उनके परिणामों से संबंधित जानकारी ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि इनकी नियमित निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को समुदाय से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी जड़ों, स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और समाज से जोड़ना आवश्यक है। इससे विद्यार्थी अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध भी विकसित होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में ‘कम बैक टू रूट्स’ की भावना को मजबूत करने के लिए महाविद्यालयों को स्थानीय समुदाय और संस्थानों के साथ सक्रिय सहभागिता बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है। इस दिशा में महाविद्यालयों द्वारा किए जा रहे नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सम्मेलन में प्रदेशभर से आए प्राचार्यों के साथ नीतिगत विषयों, नई पहल, विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उपायों तथा महाविद्यालयों की सफलता की कहानियों पर खुला संवाद सत्र आयोजित किया गया। सचिव शिक्षा ने प्राचार्यों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों एवं सुझावों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि सम्मेलन के दौरान सामने आए सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा।
समापन अवसर पर निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. सुनीता सिंह सहित उच्चतर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रदेशभर से आए महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


