पहले से 109 बच्चे ले रहे योजना का लाभ, प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार-चार हजार रुपए की सहायता
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (बिलासपुर ) 28 सितम्बर। जरूरतमंद एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला बिलासपुर में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 51 नए बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने की मंजूरी प्रदान की गई है। इस संबंध में प्रायोजन एवं पालन-पोषण देखभाल स्वीकृति समिति की बैठक उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद जिले के विभिन्न विकास खंडों से संबंधित 51 बच्चों को योजना के तहत लाभ देने की स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें सदर विकास खंड के 18, श्री नयना देवी जी के 15, झंडूता के 4 तथा घुमारवीं विकास खंड के 14 बच्चे शामिल हैं।
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि बिलासपुर जिले में पहले से 109 बच्चे प्रायोजन योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 51 नए बच्चों को स्वीकृति मिलने के बाद जिले में इस योजना से लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 160 हो जाएगी।
बैठक में बताया गया कि स्वीकृत 51 बच्चों को प्रारंभिक रूप से मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाएगा। मिशन वात्सल्य के लिए धनराशि प्राप्त होने के बाद इन बच्चों को मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन योजना का लाभ दिया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि मिशन वात्सल्य का उद्देश्य कठिन एवं संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाना तथा उन्हें उनके परिवार और सामाजिक परिवेश में सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और समुचित विकास के अवसर प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र बच्चों एवं परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा तथा अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
उन्होंने बताया कि विधवा, तलाकशुदा अथवा परित्यक्त माता के बच्चे, विस्तारित परिवार के साथ रह रहे अनाथ बच्चे, गंभीर बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे तथा ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता आर्थिक अथवा शारीरिक कारणों से उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं, प्रायोजन योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, शोषण, दुर्व्यवहार, सड़क पर रहने अथवा अन्य कठिन परिस्थितियों से प्रभावित बच्चों को भी योजना के तहत सहायता के लिए चिन्हित किया जा सकता है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ प्राप्त कर रहे बच्चों की समय-समय पर विभागीय दलों के माध्यम से जांच और उनकी स्थिति की जानकारी ली जाए। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उनके स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं के माध्यम से मिशन वात्सल्य सहित बच्चों से संबंधित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि पात्र बच्चों और उनके परिवारों की समय पर पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के संरक्षण एवं कल्याण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे तथा जरूरतमंद बच्चों की पहचान के लिए पंचायत स्तर तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्या चंदेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी गैर-संस्थागत शैली गुलरिया, जिला समन्वयक नीलम डोगरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


