जिला स्तरीय टीबी मृत्यु ऑडिट समीक्षा बैठक आयोजित
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (रिकांग पीओ ) 28 सितंबर।
जिला स्तरीय टीबी मृत्यु की त्रैमासिक ऑडिट समीक्षा बैठक आज उपायुक्त कार्यालय रिकांग पीओ में सहायक आयुक्त उपायुक्त विपिन कुमार ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिले में जून 2026 तक टीबी से होने वाली मृत्यु के मामलों की समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026 में अभी तक जिले में टीबी से संबंधित एक मृत्यु का मामला सामने आया है। इस दौरान टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा रोगियों को समयबद्ध उपचार उपलब्ध करवाने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
सहायक आयुक्त उपायुक्त विपिन कुमार ठाकुर ने खंड चिकित्सा अधिकारियों को टीबी रोगियों की नियमित एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीबी मरीजों के उपचार की नियमित निगरानी करने तथा चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवा की सही खुराक और निर्धारित अवधि तक सेवन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और फॉलोअप में किसी प्रकार की लापरवाही न हो तथा उपचार के दौरान मरीजों को आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए।
बैठक में टीबी से संबंधित मामलों की समय पर पहचान, जांच एवं उपचार, रोगियों की नियमित निगरानी तथा उपचार के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने टीबी मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने तथा उपचार की निरंतरता बनाए रखने पर भी बल दिया।
बैठक में टीबी बीमारी के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि क्षय रोग (टीबी) एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर हवा में फैलने वाले जीवाणुओं के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकती है। लंबे समय तक खांसी, बुखार, रात को पसीना आना, वजन कम होना, भूख कम लगना, कमजोरी तथा कुछ मामलों में बलगम में खून आना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को स्वयं दवा लेने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवानी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों से आग्रह किया गया कि लंबे समय तक खांसी अथवा टीबी से संबंधित अन्य लक्षण होने पर समय पर स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवाएं। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज निर्धारित उपचार पूरा करें और परिवार के सदस्यों एवं संपर्क में आने वाले लोगों को भी आवश्यक जांच एवं चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित करें। समय पर पहचान, नियमित उपचार और सामुदायिक सहयोग से टीबी के संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।
बैठक में जिला टीबी अधिकारी डॉ. सुधीर सिंह, खंड चिकित्सा अधिकारी सांगला डॉ. वेंकट, खंड चिकित्सा अधिकारी निचार डॉ. यशोदा, खंड चिकित्सा अधिकारी पूह डॉ. विनोद तथा आईएमए अध्यक्ष डॉ. तेनजिन उपस्थित रहे।


