राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कार्यशाला आयोजित
हर सप्ताह आयोजित होंगी जिला एवं उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों की बैठकें
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (रिकांग पीओ ) 12 अक्तूबर।
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री श्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आज बचत भवन रिकांग पीओ में वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी प्रदान करना तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को स्पष्ट करना रहा।
कार्यशाला के दौरान वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के अधिकार सुनिश्चित करने, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों से संबंधित दावों की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने तथा लंबित दावों का नियमानुसार निपटारा करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
माननीय राजस्व मंत्री ने जिला किन्नौर के तीनों विकास खंडों पूह, कल्पा एवं निचार के एक-एक गांव में उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों के पास लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति, दावों की जांच तथा उनके निपटारे के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि लंबित मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नियमित समीक्षा की जाए तथा पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के दावों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिला एवं उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों की बैठकें प्रत्येक सप्ताह आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की अगली बैठक 15 अक्तूबर को निर्धारित की गई है।
माननीय राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम-2006 अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के पात्र वन अधिकारों को मान्यता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि इससे जुड़े सभी अधिकारी एवं कर्मचारी इसके प्रावधानों की पूरी जानकारी रखें तथा अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें।
उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दावों की जांच निर्धारित पात्रता संबंधी शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित अभिलेखों के आधार पर की जानी चाहिए। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि किसी भी पात्र व्यक्ति अथवा समुदाय का दावा जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी न की जाए तथा प्रत्येक मामले में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने ग्राम सभाओं एवं वन अधिकार समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर इन संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। ग्राम सभाएं एवं वन अधिकार समितियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दावों के संकलन, संबंधित तथ्यों के सत्यापन तथा आवश्यक कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए समितियों के सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों, उनकी जिम्मेदारियों तथा दावों से संबंधित प्रक्रियाओं की उचित जानकारी होना आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता, पात्रता संबंधी शर्तों, दावों के सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों, ग्राम सभाओं की भूमिका तथा वन अधिकार समितियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त राजस्व, वन एवं जनजातीय विकास विभाग सहित संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया, ताकि पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के दावों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा सके और उनके निपटारे में अनावश्यक विलंब न हो।
राजस्व मंत्री ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है, ताकि पात्र व्यक्ति एवं समुदाय अपने अधिकारों, पात्रता की शर्तों तथा दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हो सकें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा करें, अभिलेखों का उचित संधारण सुनिश्चित करें तथा संबंधित समितियों के बीच समन्वय बनाए रखें।
उपायुक्त किन्नौर एवं अध्यक्ष, जिला स्तरीय वन अधिकार समिति सोनाक्षी सिंह तोमर ने राजस्व मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं पर चर्चा होने से लोगों की शंकाओं का समाधान करने तथा पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के दावों के नियमानुसार निपटारे में सहायता मिलेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करेगा।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी पूह रविंदर ठाकुर, उप अरण्यपाल अरविंद, परियोजना अधिकारी एकीकृत जनजातीय विकास किन्नौर घन श्याम दास, उपमंडलाधिकारी कल्पा प्रवीण भारद्वाज, उपमंडलाधिकारी निचार नेहा नेगी, खंड विकास अधिकारी कल्पा हिमांशी शर्मा, खंड विकास अधिकारी निचार डॉ. जितेंद्र चंदेल तथा खंड विकास अधिकारी पूह इंदर चंद सहित जिला एवं उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।


