दधोल स्कूल में 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के समापन अवसर पर बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (घुमारवीं /बिलासपुर) 17 अक्तूबर। नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने का सशक्त मंच है। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दधोल में आयोजित दो दिवसीय 33वीं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने बाल विज्ञान कांग्रेस में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि ये मॉडल विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, अध्ययन और व्यावहारिक सोच को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत मॉडलों में आसपास की समस्याओं और संभावित समाधानों पर विद्यार्थियों की सोच दर्शाती है कि उनमें समाज के प्रति संवेदनशीलता और वैज्ञानिक समझ विकसित हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास की समस्याओं को समझें, उनके कारणों का विश्लेषण करें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ें।
राजेश धर्माणी ने कहा कि विज्ञान केवल तथ्यों को याद करने का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक घटना और परिस्थिति के पीछे छिपे कारणों को समझने की प्रक्रिया है। विद्यार्थियों में क्या, क्यों, कब और कैसे जैसे प्रश्न पूछने की जिज्ञासा विकसित होनी चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण किसी भी तथ्य को बिना जांचे-परखे स्वीकार करने के बजाय उसके पीछे के तर्क और प्रमाण को समझने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि यही जिज्ञासा आगे चलकर अनुसंधान, आविष्कार और तकनीकी विकास का आधार बनती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मानव जीवन में उपयोग होने वाली अधिकांश आधुनिक सुविधाएं वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास का ही परिणाम हैं। जल शुद्धिकरण में फिल्ट्रेशन, अल्ट्रावायलेट तकनीक, ओजोन तकनीक और रिवर्स ऑस्मोसिस जैसी प्रक्रियाएं तथा कम बिजली खपत में बेहतर प्रकाश देने वाली एलईडी तकनीक इसके उदाहरण हैं। साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों ने रोगों की पहचान और उपचार की संभावनाओं को व्यापक बनाया है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से अपनी रुचि और क्षमता को पहचानते हुए भविष्य के विषयों और करियर का चयन सोच-समझ कर करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूसरों की देखा-देखी में विषय चुनने के बजाय अपनी जिज्ञासा, रुचि और योग्यता के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में शिक्षकों की भूमिका और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा दें तथा उन्हें व्यावहारिक ज्ञान के अवसर उपलब्ध करवाएं।
राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों का मूल्यांकन निष्पक्षता और योग्यता के आधार पर होना चाहिए। प्रतिभा किसी विद्यालय तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान संबंधी गतिविधियों, प्रश्नोत्तरी और अन्य प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों पर भी बल दिया। साथ ही नाट्य प्रस्तुतियों जैसी रचनात्मक गतिविधियों को उपयोगी बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से विज्ञान विषय न पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक भी विज्ञान की जानकारी आसानी से पहुंचाई जा सकती है। साथ ही कहा कि गणितीय ओलंपियाड, प्रश्नोत्तरी, मॉडल प्रदर्शनी और गतिविधि कॉर्नर जैसी पहलें भी विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने में अहम भूमिका निभाती हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर राजेश धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थियों को इसका उपयोग सहायक उपकरण के रूप में करना चाहिए। एआई से जानकारी प्राप्त करना और अपने कार्य को बेहतर बनाना उपयोगी है, किंतु विषय की मूल अवधारणाओं की समझ भी आवश्यक है। केवल तकनीकी उपकरणों पर निर्भरता से स्वतंत्र चिंतन, स्मरण शक्ति और समस्या-समाधान की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही उपयोग वही है, जो व्यक्ति के ज्ञान और क्षमताओं में वृद्धि करे।
इस मौके पर तकनीकी शिक्षा मंत्री ने अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया तथा उन्हें आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शुभकामनाएं दी।
इससे पहले उन्होंने विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का बारीकी से अवलोकन किया तथा बच्चों के साथ संवाद करते हुए उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
स्थानीय स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. सुरेश भारद्वाज ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि जिला विज्ञान पर्यवेक्षक कश्मीर सिंह ने दो दिवसीय जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के आयोजन से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस मौके पर दधोल स्कूल के पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी शिवेन शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण एवं वैज्ञानिक आधार पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग की उपनिदेशक उच्च शिक्षा स्कूल नरेश कुमारी चंदेल, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा स्कूल अरुण गौतम, जिला विज्ञान पर्यवेक्षक कश्मीर सिंह, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


