आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों की रोकथाम में जन जागरूकता महत्वपूर्ण
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (सोलन ) 23 अक्तूबर।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सोलन द्वारा वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, सेंट्रक्स, सोलन में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में लोगों को आयोडीन के महत्व, शरीर के शारीरिक एवं मानसिक विकास में इसकी भूमिका तथा आयोडीन की कमी से होने वाले विभिन्न विकारों के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की हेल्थ एजुकेटर पद्मिनी नेगी एवं बीसीसी समन्वयक राधा चौहान ने उपस्थित प्रतिभागियों को आयोडीन के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
उन्होंने अवगत करवाया कि जिस प्रकार शरीर के समुचित विकास एवं स्वस्थ जीवन के लिए अन्य पोषक तत्व आवश्यक हैं, उसी प्रकार आयोडीन भी एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह थायराइड ग्रंथि के सामान्य कार्य, शरीर की वृद्धि, मस्तिष्क के विकास तथा चयापचय की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था में आयोडीन की गंभीर कमी होने से गर्भपात, मृत शिशु का जन्म तथा बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है। बचपन में आयोडीन की कमी से सीखने की क्षमता एवं बौद्धिक विकास भी प्रभावित हो सकता है।
शरीर में आयोडीन की कमी से घेंघा रोग (Goitre) हो सकता है। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, जिसके कारण गर्दन के अगले हिस्से में सूजन या गांठ जैसी दिखाई दे सकती है। आयोडीन की कमी से थायराइड हार्माेन का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में इसकी कमी के दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।
स्वास्थ्य शिक्षकों ने अवगत करवाया कि आयोडीन की कमी से बचाव का सबसे सरल एवं प्रभावी उपाय पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक का नियमित सेवन करना है। समुद्री मछलियों, समुद्री खाद्य पदार्थों तथा समुद्री शैवाल में भी आयोडीन पाया जाता है। दैनिक आहार में आयोडीन की आवश्यक मात्रा प्राप्त करने के लिए आयोडीन युक्त नमक का उपयोग महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने उपस्थित लोगों को सलाह दी कि भोजन तैयार करने में आयोडीन युक्त नमक का ही प्रयोग करें तथा नमक को नमी से बचाकर बंद एवं सूखे बर्तन में रखें। नमक के पैकेट पर आयोडीन युक्त होने का उल्लेख अवश्य जांचें। नमक का सेवन सीमित मात्रा में करना ही आवश्यक है, क्योंकि अधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि प्रत्येक परिवार आयोडीन युक्त नमक के महत्व को समझकर उसका उचित उपयोग करे, तो आयोडीन अल्पता से होने वाली अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में सहायता मिल सकती है।
स्वास्थ्य शिक्षकों ने उपस्थित प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वह स्वयं भी आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करें तथा अपने परिवार, मित्रों और अन्य को भी इसके महत्व के प्रति जागरूक करें, ताकि एक स्वस्थ एवं सुपोषित समाज के निर्माण में जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।


