मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय बैठक आयोजित

स्कॉलरशिप, विवाह अनुदान और घर निर्माण में नए मामलों को मिली स्वीकृति

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (बिलासपुर )24 अगस्त ।
जिला मुख्यालय के बचत भवन में शनिवार देर शाम उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की अध्यक्षता में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के विभिन्न घटकों से संबंधित नए व पुराने मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में घर निर्माण के तीन पुराने मामलों को मंजूरी दी गई, जिनके लिए 2 लाख 50 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गई। इसी प्रकार विवाह अनुदान के तीन नए मामलों पर 6 लाख रूपए व्यय किए जाएंगे। उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के तहत तीन लाभार्थियों को सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया, जिस पर 1 लाख 37 हजार 690 रूपए खर्च होंगे।

जिला स्तरीय सुखाश्रय कोष से एक लाभार्थी को स्टार्टअप सहायता देने का भी निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत 1 लाख 40 हजार रूपए बचत खाते में तथा 60 हजार रूपए एफडीआर के रूप में प्लेज किए जाएंगे। दूसरी किस्त सीडीपीओ की अनुश्रवण रिपोर्ट के बाद जारी होगी। बैठक में भूमि आवंटन से जुड़े दो मामलों की समीक्षा भी की गई।

उपायुक्त ने बताया कि स्कॉलरशिप योजना के अंतर्गत अब तक 125 मामलों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इस वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक 26 नए मामलों को मंजूरी दी गई है, जिन पर 30 लाख रूपए व्यय होंगे।

उन्होंने कहा कि योजना शुरू होने से अब तक जिले के 160 बच्चों को 1 करोड़ 6 लाख 68 हजार 190 रूपए की सामाजिक सुरक्षा राशि दी जा चुकी है। वर्तमान में 148 लाभार्थी प्रतिमाह 4 हजार रूपए की दर से सहायता प्राप्त कर रहे हैं ।योजना के अंतर्गत अब तक 22 लाभार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 13 लाख 91 हजार 981 रूपए, 15 लाभार्थियों को विवाह अनुदान स्वरूप 30 लाख रूपए, छह लाभार्थियों को स्टार्टअप सहायता के लिए 9 लाख 60 हजार रूपए तथा 23 लाभार्थियों को घर निर्माण हेतु 30 लाख रूपए की राशि जारी की जा चुकी है।

उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की संवेदनशील पहल है, जो राज्य सरकार की सामाजिक सरोकार और दूरदर्शिता का प्रतीक है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के अनाथ, बेसहारा और बाल देखरेख संस्थानों में रह रहे बच्चों को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, विवाह अनुदान, स्टार्टअप सहायता, घर निर्माण और मासिक सामाजिक सुरक्षा भत्ता प्रदान कर आत्मनिर्भर भविष्य उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला में 18 बच्चे अपराजिता अनाथालय संस्थान भगेड़ और 29 बच्चे नया सवेरा दिव्यांग शिक्षा संस्थान घुमारवीं में रह रहे हैं। इन बच्चों को अब तक तीन बार एक्सपोज़र विज़िट पर भी ले जाया गया है— पहली बार बाघा बॉर्डर, दूसरी बार श्री नैना देवी जी और तीसरी बार मनाली तथा लाहुल-स्पीति का भ्रमण कराया गया। इन कार्यक्रमों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें राज्य की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ने का अवसर मिला है।
इस बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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