युवाओं को मत्स्य पालन से जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर होंगे सृजित, अमृत सरोवरों मेंहोगा मत्स्य उत्पादन
मत्स्य उत्पादन बढ़ाकर 22 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य
डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (शिमला ) 16 जुलाई। हिमाचल प्रदेश मत्स्य विभाग के निदेशक एवं वार्डन ओमकांत ठाकुर ने पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और नवाचार के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाया जाएगा, ताकि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मछुआरा समुदाय की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
वर्ष 2020 बैच के आईएएस अधिकारी ओमकांत ठाकुर इससे पूर्व अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर तथा उपमंडलाधिकारी मंडी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को मत्स्य पालन से जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके लिए अमृत सरोवरों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग करते हुए उनमें मत्स्य बीज डाला जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और लोगों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मछुआरा समुदाय के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। जलाशयों से पकड़ी जाने वाली मछलियों के लिए 100 रुपए प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त बंद सीजन के दौरान मछुआरा परिवारों को प्रतिवर्ष 3500 रुपए की सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। वहीं, जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर रॉयल्टी की दर घटाकर केवल एक प्रतिशत कर दी गई है, जिससे मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।
निदेशक एवं वार्डन ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश के कुल मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 20 हजार मीट्रिक टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 22 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभाग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा मत्स्य पालकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देगा।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की व्यापक समीक्षा कर उन्हें और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। हमीरपुर जिले के नादौन में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क को शीघ्र ही शुरू किया जाएगा। यह परियोजना मत्स्य पालन क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार और उद्यमिता को भी नई गति प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि विभाग की ‘फिश ऑन व्हील्स’ योजना को भी जल्द प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से मछुआरे सीधे उपभोक्ताओं तक ताजी मछली पहुंचा सकेंगे, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी, बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ओमकांत ठाकुर ने कहा कि मत्स्य विभाग प्रदेश में मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा मछुआरा समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में मत्स्य उत्पादन, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।


