उहल नदी में 40 हजार ब्राउन ट्राउट अंगुलिकाओं का संग्रहण

ट्राउट संरक्षण एवं सतत मत्स्य प्रबंधन को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित, उपायुक्त विशेष रूप से रहे उपस्थित

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (मंडी ) 09 सितंबर। मत्स्यिकी विभाग, मंडी द्वारा बरोट क्षेत्र की उहल नदी में गत दिवस 40 हजार ब्राउन ट्राउट अंगुलिकाओं का संग्रहण किया गया। इस अवसर पर ट्राउट मछली के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत् उपयोग के प्रति स्थानीय लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, जो कि रिवर मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ट्राउट का संरक्षण न केवल स्थानीय मत्स्य पालकों एवं एंगलर्स की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि यह क्षेत्र की जलीय जैव-विविधता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्थानीय समुदाय से अपील की कि वे नदी एवं उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपना सक्रिय सहयोग दें।
सहायक निदेशक मत्स्यिकी नीतू सिंह ने उहल नदी में ट्राउट मछली के संरक्षण एवं इसके महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 40 सेंटीमीटर से कम लंबाई की ट्राउट मछली का शिकार वर्जित है। प्रत्येक वर्ष नवंबर से फरवरी तक चार माह का बंद मौसम रहता है, जिसके दौरान ट्राउट मछली पकड़ना पूर्णतः अवैध एवं प्रतिबंधित है।
उन्होंने बताया कि ट्राउट मछली पकड़ने के लिए केवल रॉड एवं लाइन उपकरण ही अनुमत है। मत्स्य आखेट के लिए दैनिक लाइसेंस शुल्क 300 रुपये प्रति दिन निर्धारित है, जिसे मत्स्यिकी विभाग से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने ट्राउट संरक्षण से होने वाले आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय लाभों पर भी प्रकाश डाला तथा स्थानीय लोगों एवं ट्राउट एंगलर्स से मत्स्य संरक्षण नियमों का पालन करने का आह्वान किया।
सहायक निदेशक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा CWPIL No. 1/2025 के संदर्भ में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण एवं पुनर्स्थापन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्ष 2024 में शानन पावर प्रोजेक्ट द्वारा बरोट स्थित रिजरवॉयर से उहल नदी में सिल्ट छोड़े जाने के कारण मत्स्य संपदा को हुई क्षति की भरपाई करना तथा नदी में पूर्व की भांति ट्राउट मत्स्य संसाधन को पुनः स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए संबंधित परियोजना द्वारा मत्स्यिकी विभाग को 12 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है, जिसके माध्यम से आगामी कुछ वर्षों तक उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण एवं पुनर्स्थापन किया जाना प्रस्तावित है।
मत्स्य अधिकारी बरोट विमल गुलेरिया ने उपस्थित लोगों को ट्राउट मछली के इतिहास, उसके जीवन चक्र, पोषक गुणों तथा स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर एसडीएम पधर सुरजीत सिंह सहित मत्स्यिकी विभाग के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जागरूकता शिविर में स्थानीय जनता, ट्राउट मत्स्य पालक, ट्राउट एंगलर्स, महिला मंडल समूहों तथा अन्य स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।

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