गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता

डेली पब्लिक लाइव न्यूज (मंडी ) 2 अक्तूबर। गंभीर बीमारी किसी भी परिवार के लिए बड़ी चुनौती होती है। लंबे समय तक चलने वाला उपचार, नियमित दवाइयां और मरीज की निरंतर देखभाल परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ा देती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह चुनौती और भी कठिन हो जाती है। ऐसे परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सहारा योजना राहत और उम्मीद की किरण बन रही है।
योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पात्र मरीजों को गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों के उपचार तथा देखभाल में सहयोग के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से जमा की जाती है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयों तथा देखभाल से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है।
मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत पार्किन्सोनिज्म, घातक कैंसर, पक्षाघात के कारण स्थायी दिव्यांगता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, तीव्र अथवा दीर्घकालिक गुर्दे की विफलता सहित निर्धारित गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारियों से प्रभावित पात्र लोगों को सहायता प्रदान की जाती है।
पत्नी की गंभीर बीमारी में सरकार बनी सहारा
सरकाघाट तहसील के कंडयोल निवासी रतन सिंह की पत्नी कमला देवी अचानक बीमार हो गईं। परिवार उन्हें उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला ले गया, जहां जांच के दौरान उनके कैंसर पीड़ित होने का पता चला। गंभीर बीमारी के बाद परिवार के सामने उपचार का खर्च और लगातार देखभाल की चिंता स्वाभाविक थी।
स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उन्हें मुख्यमंत्री सहारा योजना की जानकारी मिली। वे बताते हैं कि योजना के तहत मिलने वाली राशि पत्नी की दवाइयों और देखभाल से जुड़े खर्चों में मददगार साबित हो रही है। प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस सहायता ने उनकी उपचार संबंधी चिंता कम की है।
पक्षाघात में उपचार का सहारा बनीं सहायता राशि
नवाही गांव की सुमन कुमारी के परिवार को भी मुख्यमंत्री सहारा योजना का लाभ मिला है। उनकी ननद सरोज लंबे समय से पक्षाघात जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित दवाइयों तथा देखभाल की आवश्यकता रहती है।
सुमन बताती हैं कि उन्हें सहारा योजना की जानकारी आशा कार्यकर्ता के माध्यम से मिली। वित्तीय सहायता का उपयोग सरोज की दवाइयों और अन्य आवश्यकताएं पूरा करने में हो रहा है। उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज की निरंतर देखभाल परिवार के लिए आसान नहीं होता और ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता काफी उपयोगी साबित होती है।
बीमारी से जूझ रहे हुक्म चंद को मिला आर्थिक संबल
गांव लंगेहड़ के हुक्मचंद भी लंबे समय से पक्षाघात से जूझ रहे हैं। वे बताते हैं कि हर माह मिलने वाली यह सहायता राशि दवाइयों इत्यादि से जुड़े खर्चे पूरा करने में मदद कर रही है, जिसके लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।
सरकाघाट उपमंडल में 104 लाभार्थी पंजीकृत
तहसील कल्याण अधिकारी सरकाघाट पूनम शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत सरकाघाट उपमंडल में कुल 104 लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें तहसील बलद्वाड़ा से 56 तथा तहसील सरकाघाट से 48 लाभार्थी शामिल हैं। प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र लाभार्थियों को उनके बैंक खातों में प्रतिमाह आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंच रही सहायता
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित पात्रता एवं दस्तावेजों के अनुरूप आधार-आधारित ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। आवेदन के साथ आधार कार्ड, बीमारी से संबंधित चिकित्सा अभिलेख, हिमाचली बोनाफाइड प्रमाण-पत्र, वैध बीपीएल अथवा आय प्रमाण-पत्र तथा बैंक खाते का विवरण प्रस्तुत करना होता है।
योजना के लिए निर्धारित पात्रता के अनुसार बीपीएल परिवारों के सदस्य तथा ऐसे परिवार जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 4 लाख रुपये से अधिक नहीं है, निर्धारित शर्तों के तहत लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


