उपायुक्त का कारीगरों के सशक्तिकरण पर जोर

उपायुक्त का कारीगरों के सशक्तिकरण पर जोर

डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (ऊना ) 29 मार्च। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में कारीगरों के 25 आवेदनों को सत्यापित कर अनुमोदन के लिए अग्रसारित किया गया है। उन्होंने बताया कि बीते कल जिला स्तरीय समिति की बैठक में योजना के तहत चरण-2 में सत्यापित किए गए कारीगरों के 25 आवेदनों को प्रस्तुत किया गया, जिन्हें अब स्वीकृति प्रदान करने के लिए योजना के पोर्टल पर अग्रसारित किया गया है।


उपायुक्त ने जिले के सभी पारंपरिक कारीगरों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के www.pmvishwakarma.gov.in पोर्टल पर जल्द से जल्द पंजीकरण करवाएं और योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले लाभों का फायदा उठाएं। यह योजना पारंपरिक कारीगरों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आजीविका को भी सुरक्षित करेगी।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
इस योजना का उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करना है। यह योजना उन कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई है, जो पारंपरिक व्यवसायों में जुडें हैं और जिन्हें आधुनिक संसाधनों तथा प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
चरणबद्ध तरीके से किया जाता है सत्यापन
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत आवेदनों को चरणबद्ध तरीके से सत्यापित किया जाता है। सत्यापन प्रक्रिया के पहले चरण में इच्छुक कारीगर को www.pmvishwakarma.gov.in आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करना होता है जिसमें आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। दूसरे चरण में आवेदन संबंधित ग्राम पंचायत और शहरी निकाय को भेजा जाता है। यहां निकाय कारीगर की पारंपरिक शिल्पकारी का भौतिक सत्यापन करता है। तीसरे चरण में स्थानीय निकाय द्वारा सत्यापित किए गए आवेदनों को जिला स्तरीय समिति के पास भेजा जाता है तथा उपायुक्त की अध्यक्षता में समिति इन आवेदनों की समीक्षा करती है और स्वीकृति प्रदान करती है। चौथे चरण में स्वीकृत आवेदनों को योजना के पोर्टल पर अंतिम मंजूरी दी जाती है जिसमें कारीगरों को प्रमाणपत्र और पहचान पत्र जारी किए जाते हैं ताकि ऋण, प्रशिक्षण और औजारों की सहायता की प्रक्रिया शुरू होती है।
योजना के पात्र
इस योजना में 18 पारंपरिक कारीगर समुदायों में बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, राजमिस्त्री, टोकरी/चटाई बनाने वाले, धोबी, दर्जी, मोची, नाई, खिलौना बनाने वाले आदि शामिल हैं।
इस मौके पर संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग अंशुल धीमान, उद्योग विभाग के एक्सटेंशन अधिकारी अंकित भाटिया, विप्लव राणा, डोमेन विशेषज्ञ ओम प्रकाश, जयदेव सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।

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