प्रधान सचिव जल शक्ति डॉ. अभिषेक जैन ने कहा-
सहायक और अधिशाषी अभियंता करेंगे योजनाओं का निरिक्षण
मासिक आधार पर होगा निरिक्षण, रिपोर्ट प्रधान सचिव को भेजने के निर्देश
इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा जल प्रबंधन में तकनीक के प्रयोग पर पालमपुर में कार्यशाला आयोजित
डेली पब्लिक लाइव न्यूज़ (पालमपुर )3 जुलाई।
प्रधान सचिव जल शक्ति विभाग डॉ. अभिषेक जैन ने सभी सहायक अभियंताओं के कार्यालयों को दो सप्ताह में डिजीटाइज करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने सहायक अभियंताओं को 1 करोड़ से अधिक की योजना और अधिशाषी अभियंता को 5 करोड़ से अधिक की योजना को स्वंय निरिक्षण करने के निर्देश भी दिए। इस संबंध में निरिक्षण रिपोर्ट प्रधान सचिव को भेजने को भी कहा गया है। प्रधान सचिव ने कहा है कि दो माह में एक दिन सभी अधिशाषी अभियंता अपने क्षेत्राधिकार के तहत सबसे दूरस्थ गांव का दौरा कर वहां पर पेयजल आदि की योजनाओं को जांचेंगे। इस संबंध में भी रिपोर्ट प्रधान सचिव को भेजने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. अभिषेक जैन ने जल शक्ति विभाग की ओर से कार्यात्मक प्रभावशीलता में सुधार, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित कामकाज के लाभ और इस पर आधारित कार्यप्रणाली में तेजी लाने के साथ साथ आने वाली चुनौतियों पर कार्यशाला के आयोजन के दौरान ये निर्देश जारी किए।
कार्यशाला का आयोजन पालमपुर के विला केमेलिया होटल में किया गया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग के 75 से अधिक अधिशाषी अभियंता, 23 अधीक्षण अभियंता कार्यालय, 4 मुख्य अभियंता कार्यालय सहित प्रमुख अभियंता कार्यालय डिजीटल हो चुके हैं। अब सहायक अभियंता कार्यालयों को पूर्णत: डिजीटल किया जाएगा। इससे कार्य में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को उपरोक्त निर्देशों का अक्षरश: पालन करने को कहा। साथ ही बरसात के मौसम में पूर्ण तैयारियां रखने और लोगों को पेयजल की किल्लत सहित गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। लंबित योजनाओं को दोगुनी गति से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।
डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) और सेंसर आधारित प्रणालियों के माध्यम से पेयजल और सिंचाई योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सकती है। इससे न केवल पानी की बर्बादी और लीकेज को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी पानी की गुणवत्ता और समान वितरण पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी। साथ ही मल निकासी और सिंचाई योजनाओं में भी अभूतपूर्व सुधार होगा।
कार्यक्रम में विभिन्न समस्याओं पर परिचर्चा भी की गई। इसमें विभाग के अधिकारियों सहित विभिन्न जन प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इसके अलावा लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी शंकाओं का समाधान भी किया गया। विभिन्न विशेषज्ञों ने तकनीकि पहलुओं पर प्रकाश डाला और तकनीक के माध्यम से जल प्रबंधन, मल निकासी और सिंचाई योजनाओं के बेहतर प्रबंधन को बेहतर बनाने के तरीके भी सुझाए।
कार्याक्रम में विभिन्न अधिकारियों कर्मचारियों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में पालमपुर की महापौर राधा सूद, उप महापौर नीलम मलिक, प्रमुख अभियंता (प्रोजेक्ट जल शक्ति विभाग मंडी) डॉ. धर्मेंद्र गिल, मुख्य अभियंता धर्मशाला जोन दीपक गर्ग सहित विभाग के धर्मशाला जोन के सभी अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता, विभिन्न अधिकारी-कर्मचारी, पंचायती राज प्रतिनिधि और स्वयं सहायता समूह के पदाधिकारी मौजूद रहे।


