महिलाएं जैविक खेती और खाद्य प्रसंस्करण से बनें आत्मनिर्भर, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों पर दें विशेष ध्यान: राजेश धर्माणी
100 से अधिक लाभार्थियों को तकनीकी शिक्षा मंत्री ने बांटे प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और स्टाइपेंड चैक
सिल्क समग्र योजना के अंतर्गत बिलासपुर के 100 रेशम कीट पालकों को बांटे स्वीकृति पत्र
घुमारवीं के सेरीकल्चर संस्थान में उद्योग विभाग और हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ महिला स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम
डेली पब्लिक लाइव न्यूज (घुमारवीं /बिलासपुर) 14 अक्तूबर ।नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि महिलाओं को जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इस दिशा में महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ आकर्षक पैकेजिंग, उचित लेबलिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल महिला उद्यमियों के उत्पादों को अलग पहचान मिलेगी बल्कि आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं स्थित सेरीकल्चर संस्थान में उद्योग विभाग और हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महिला स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने चयनित 100 से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और स्टाइपेंड चेक वितरित किए। इसके अतिरिक्त, उद्योग विभाग की सिल्क समग्र योजना के अंतर्गत जिला बिलासपुर के सामान्य वर्ग के 100 रेशम कीट पालकों को रेशम कीट पालन गृहों के निर्माण के लिए स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि सिल्क समग्र योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभार्थी को रेशम कीट पालन गृह के निर्माण के लिए एक लाख 85 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी तथा जिला बिलासपुर के लाभार्थियों के लिए कुल एक करोड़ 85 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि रेशम कीट पालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय के अतिरिक्त साधन विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन की भावना के अनुरूप कृषि, प्राकृतिक खेती, दुग्ध उत्पादन और स्वरोजगार के क्षेत्रों में नए अवसर उपलब्ध करवाने पर जोर दे रही है। किसानों और पशुपालकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।
श्री धर्माणी ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कृषि में रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित इस्तेमाल से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रेरित करना जरूरी है। गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार करने, स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लेबलिंग और विपणन पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित करने का उद्देश्य केवल उन्हें आजीविका कमाने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि ऐसे उत्पाद तैयार करने में सक्षम बनाना है जो गुणवत्ता, उपयोगिता और उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता के साथ आकर्षक पैकेजिंग और सही लेबलिंग ग्राहक का विश्वास जीतने में अहम भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम में महिलाओं को मिला खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। खाद्य प्रसंस्करण के तहत अचार, चटनी, जैम और पेस्ट जैसे उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी गई, जबकि जैविक खेती प्रशिक्षण के माध्यम से प्राकृतिक कृषि उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग विभाग और हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश की महिला उद्यमियों को कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के सभी 12 जिलों की 700 महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की इच्छुक महिलाओं के साथ-साथ पहले से उद्यम संचालित कर रही महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
इस पहल के माध्यम से खाद्य एवं पेय पदार्थ, पारंपरिक कला एवं शिल्प, हस्तशिल्प एवं हथकरघा, सौंदर्य एवं स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि तथा जलीय कृषि जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं की तकनीकी दक्षता, व्यवसाय प्रबंधन क्षमता और डिजिटल कौशल को विकसित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के राज्य समन्वयक अतुल करोहटा, महाप्रबंधक अमित कालथाइक, सेक्टर स्पेशलिस्ट (ट्रेनिंग) कपिल भारद्वाज तथा महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र मनोज कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


